‘सम्राट पृथ्वीराज’ यूपी टैक्स फ्री, लेकिन ओमान, कुवैत में बैन क्यों?

बॉलीवुड स्टार कुमार की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ तमाम विवादों बीच रिलीज होने जा रही है. फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ अपने से लेकर कहानी तक को लेकर विवादों जरिये लगातार सुर्खियों में बनी हुई है. लेकिन, इस फिल्म रिलीज होने के ही दिन ‘सम्राट’ के नाम के एक और विवाद जुड़ गया है. दरअसल, ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को ओमान और में बैन कर दिया गया. इस फिल्म बैन किये जाने का फैसला किस आधार पर गया है. इसके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन, फिल्म की स्क्रीनिंग देखने के बाद यूपी में ‘पृथ्वीराज’ को टैक्स फ्री कर दिया गया. बहुत हद संभव है कि पृथ्वीराज के ऐतिहासिक को देखते हुए अन्य राज्य इसे टैक्स फ्री करने का फैसला ले हैं. लेकिन, इस तमाम से इतर सबसे अहम सवाल ये है आखिर वो क्या वजहें होंगी कि ओमान और कुवैत ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को बैन करने का फैसला लिया लिया गया गया

मोहम्मद गोरी इस्लामी आक्रांत बताए जाने से फिल्म मुस्लिम विरोधी जाएगी क्या?

क्या पृथ्वीराज आखिरी हिंदू सम्राट नहीं थे

मध्यकालीन महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ पर ‘सम्राट पृथ्वीराज’ एक पीरियड ड्रामा है. और, इस फिल्म ऐतिहासिक साक्ष्यों को आधार मानते हुए पृथ्वीराज चौहान को भारत के हिंदू सम्राट के तौर पर दिखाया गया है. और, इतिहास के पर नजर डालने पर ये बात स्थापित भी है. क्योंकि, 1192 में हुए के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के होने के साथ ही की सत्ता पर बाह्य आक्रांताओं का कब्जा हो गया. तो, ऐतिहासिक के पर तकनीकी आधार पर भी पृथ्वीराज को हिंदू सम्राट कहा जा सकता. फिर इसमें कौन सी बात कह दी गई, जो फिल्म ‘सम्राट’ को बैन कर दिया गया.

सबसे पहला तथ्य यही लगता है कि पृथ्वीराज एक हिंदू सम्राट के तौर दिखाए जाने पर ही ऐतराज जताया जा हो. क्योंकि, कश्मीरी पंडितों नरसंहार और पलायन पर बनी ‘द फाइल्स’ को भी जैसे कई देशों में बैन झेलना पड़ा था. क्योंकि, इस फिल्म सच्चाई के साथ ऐतिहासिक रूप से तथ्यात्मक प्रस्तुत की गई थीं. और, ऐसी तथ्यात्मक और उसमें भी भारतीय इतिहास के परिप्रेक्ष्य बातों के लिए न केवल में बल्कि, विदेश (खासकर मुस्लिम देशों) में भी सवाल खड़े किए जाते जाते.

क्या मुस्लिम विरोधी है ‘सम्राट पृथ्वीराज’?

मुस्लिम आक्रांता लुटेरे मोहम्मद गोरी और पृथ्वीराज के हुए युद्धों को फिल्म ‘सम्राट’ में दिखाया गया है. क्या केवल वजह से फिल्म को मुस्लिम विरोधी कहा जा है? इतिहास को उसी रूप में सामने रखना मुस्लिम नहीं साबित किया जा सकता है. मुस्लिम आक्रांता गोरी को ऐतिहासिक तथ्यों को खारिज हुए क्या एक ईसाई हमलावर तौर पर दिखाए जाने से इतिहास हुए घटनाएं बदल जाएंगी. ‘सम्राट’ के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी फिल्म बनाने के लिए किसी सिनेमाई का इस्तेमाल नहीं किया है. जो आमतौर आजकल कई वेब सीरीज और फिल्मों फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर ली है.

फिल्म के महाकवि चंद बरदाई की पृथ्वीराज रासो को आधार गया है. लेकिन, इसके साथ रासो के प्रादेशिक स्तर पर किए अलग-अलग का भी अध्ययन इसमें शामिल नजर आता. पृथ्वीराज चौहान बारे में यूं तो केवल तीन ही महाकाव्य हैं. लेकिन, पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महावाक्य और रासो पर कई टीकाएं और भाष्य मौजूद. हां, ये बात है कि भारतीय इतिहासकारों का एक वर्ग महाकाव्यों को विश्वसनीय नहीं मानता. क्योंकि, इन इतिहासकारों अनुसार, ये तमाम महाकाव्य कवियों द्वारा लिखे गए हैं. लेकिन, अपने राजा बड़ाई में लिखा गया कोई महाकाव्य क्या विरोधी हो सकता है?

‘सम्राट पृथ्वीराज’ में भी जातिवाद का विवाद

‘सम्राट पृथ्वीराज’ कहने तो एक महान भारतीय योद्धा और राजा की है. लेकिन, पिछले कुछ में देश के अंदर ऐसे महानायकों जाति के खेमे में बांटने काम भी काफी तेजी से हुआ है. इतिहास के महानायकों पर अलग-अलग द्वारा दावा किया जाता है कि वह जाति के थे. और, ‘सम्राट पृथ्वीराज’ भी इस विवाद से बच नहीं सकी. दिल्ली हाईकोर्ट फिल्म के अभिनेता अक्षय कुमार के एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें आरोप गया था कि फिल्म में सम्राट को एक राजपूत राजा के तौर दिखाया गया है. जबकि, पृथ्वीराज चौहान एक गुर्जर राजा थे.

इस विवाद यशराज फिल्मस की ओर से साफ गया कि फिल्म पूरी तरह जाति को लेकर पूरी तरह से तटस्थ है. और, इसमें पृथ्वीराज राजपूत या गुर्जर राजा के तौर पर नहीं गया है. दिल्ली हाईकोर्ट यशराज फिल्मस के वकीलों ने कि ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को एक भारतीय फिल्म के तौर पर बनाया है. और, इसमें जाति जैसे मुद्दे को नहीं छेड़ा गया है. वैसे, यशराज फिल्मस बयान को आधार मानकर इस याचिका को कर दिया गया है. लेकिन, अहम सवाल है कि क्या भारतीय समाज अभी खुद को एक राष्ट्र के पर एक नहीं पता है? क्या पृथ्वीराज सिर्फ एक भारतीय हिंदू राजा के में नहीं देखा जा सकता है?

मेरी राय

‘सम्राट’ के ओमान और कुवैत बैन होने से अंदाजा लगाया जा है कि अपने-अपने को लेकर हर कोई अपनी स्वतंत्र राय रखता है. शायद ओमान और कुवैत के लिए मोहम्मद गोरी महानायं और, ये देश पर अपना दावा मजबूत करने के लिए फिल्म को बैन किया हो. या, ये भी सकता है कि इन मुस्लिम देशों से उम्माह को कोई संदेश दिया जा रहा. क्योंकि, भारत के इतिहास में पृथ्वीराज की मौत के ही दिल्ली की सत्ता पर वंश की स्थापना का रास्ता खुला था. क्योंकि, हिजाब से आतंकी यासीन मलिक की सजा तक ये मुस्लिम देश अपनी राय भारत पर थोपने की कोशिश करते रहते हैं. फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ पर बैन को समझना इतना भी आसान नहीं है.

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